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छत्तीसगढ़ विधानसभा में बवाल: गोबर खाद घोटाले पर घिरे वन मंत्री, विधायक दलेश्वर साहू का सीधा आरोप

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बवाल: गोबर खाद घोटाले पर घिरे वन मंत्री, विधायक दलेश्वर साहू का सीधा आरोप

रायपुर, 24 फरवरी 2026।बजट सत्र के दौरान आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में उस समय जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया, जब मरवाही वनमंडल में गोबर खाद खरीदी में कथित घोटाले का मुद्दा सदन में गूंजा। विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सीधे वन मंत्री केदार कश्यप पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया, जबकि मंत्री ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए केवल एक शिकायत मिलने की बात कही।

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फर्जी हस्ताक्षर और प्रमाणपत्रों पर उठा सवाल

विधायक दलेश्वर साहू ने सदन में दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि जनवरी 2022 से जनवरी 2026 के बीच गोबर खाद आपूर्ति से जुड़े प्रमाणपत्रों में फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत सामने आई है। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन सरकार उसे सार्वजनिक करने से बच रही है।

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साहू ने सदन में खुली चुनौती दी –

“अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो जांच रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाए। आखिर किसे बचाया जा रहा है?”उनका आरोप था कि अधिकारियों की मिलीभगत से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया और मंत्री को भी भ्रामक जानकारी देकर सदन को गुमराह किया जा रहा है।

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आपूर्ति, भुगतान और स्टॉक पंजी पर घेरा

विधायक साहू ने 17 अक्टूबर 2022 से 21 सितंबर 2023 के बीच की अवधि को विशेष रूप से उठाया। उन्होंने पूछा: इस दौरान गोबर खाद की वास्तविक आपूर्ति कितनी हुई?भुगतान किन-किन मदों से और किसके अनुमोदन से किया गया?

स्टॉक पंजी में क्या एंट्री दर्ज हैं?

किन अधिकारियों ने प्रमाणपत्र जारी किए?उन्होंने कहा कि “रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है, जिसकी बू सीधे अनियमितता की ओर इशारा करती है।”

मंत्री का जवाब और बढ़ा विवाद

वन मंत्री केदार कश्यप ने जवाब में कहा कि जनवरी 2022 से जनवरी 2026 के बीच केवल एक शिकायत प्राप्त हुई है और उसकी जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। मंत्री ने यह भी दावा किया कि 17 अक्टूबर 2022 से 21 सितंबर 2023 के बीच मरवाही वनमंडल में गोबर खाद की कोई आपूर्ति ही नहीं हुई, इसलिए भुगतान या स्टॉक पंजी में प्रविष्टि का प्रश्न ही नहीं उठता।

लेकिन मंत्री के इस बयान ने विवाद और बढ़ा दिया। विपक्ष ने इसे “तथ्यों से परे” बताते हुए जोरदार विरोध किया।

“गलत जानकारी देकर मंत्री को बचाया जा रहा”

दलेश्वर साहू ने दो टूक कहा:

“अधिकारियों ने मंत्री को गलत जानकारी दी है। सदन को भ्रमित करने की कोशिश हो रही है। अगर जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित डीएफओ पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट को दबाने की कोशिश हो रही है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई से बचा जा सके।

सदन में तीखी नोकझोंक, सरकार असहज

मामले को लेकर सदन में देर तक हंगामा, नारेबाजी और तीखी बहस चलती रही। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में उठे इस मुद्दे ने सरकार को असहज स्थिति में ला दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई तो यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। विपक्ष इसे बड़े घोटाले के रूप में पेश करने की तैयारी में है, जबकि सरकार जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कह रही है।

स्पष्ट है कि मरवाही वनमंडल की गोबर खाद खरीदी का यह मामला अब सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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